वामपंथी चीन सरकार ने लगाया रमजान पर प्रतिबंध ; भारतीय वामपंथी सेक्युलरों मे क्यों छाई मुर्दों सी ख़ामोशी?

14 Jun 16
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इस्लामी 'पवित्र रमजान' (आजकल के हिसाब से 'रमदान' जो अधिक अरबी इसलिए अधिक वहाबी, और इसलिए सुनने में अधिक सेक्युलर है) का महीना आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है, और फेसबुक और ट्विटर पर चारों ओर मुस्लिमों और ग़ैर-मुस्लिमों के लिए शुभकामनाएं देखने को मिल रही हैं।

बेशक़, जो इन दिनों में अपने आसपास की दुनिया को मुबारक़ न कहे, ऐसा 'असहिष्णु' बनना क्या आप पसंद करेंगे? हमें भी ऐसा कहलाने का डर है, तो हम भी अपनी हार्दिक बधाई दुनिया की सभी मुस्लिम और गैर-मुस्लिम आबादी को देते हैं, 'शांति' और 'भाईचारे' के इस महान त्योहार के अवसर पर; हालांकि यह अलग बात है कि अपनी प्रवृत्ति को जारी रखते हुए TheReligionOfPeace.com वेबसाइट ने अपने दैनिक 'रमजान बमकांड स्कोरकार्ड' इस साल भी प्रकाशित करने शुरू कर दिए हैं। आप और अधिक 'शांति' की प्राप्ति के लिए एक नज़र इस पर भी डाल सकते हैं।

अब, कहानी की मुख्य जड़ पर आते हैं। कथित धर्मनिरपेक्ष उदारवादियों के भारतीय वामपंथी गिरोह ने दशकों से हर संभव मंच के माध्यम नंगा समर्थन किया है देश में जिहादी और इस्लामी शक्तियों का, यह एक खुला रहस्य है। यह आश्चर्य की बात होगी कई लोगों के लिए कि यह एक मुस्लिम कॉमरेड ही था सज्जाद जहीर नाम का, कि जिसने वास्तव में आज़ादी से पहले के काल में अलग धर्म के आधार पर भारतीय मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र का प्रस्ताव रखा था। हालांकि दुनिया भर में हर गैर मुस्लिम आबादी को मूर्ख बनाने के लिए वामपंथी लगातार यह कहते फिरते हैं कि धर्म उनके लिए अफीम है, यह एक अलग बात है।
सोवियत संघ के पतन के पश्चात उत्तरी कोरिया, वेनेजुएला और क्यूबा के रूप में कुछ छोटे-मोटे वामपंथी देशों को छोड़ दिया जाए, तो भारतीय वामपंथी ठग गिरोह केवल चीन को ही अपने मक्का के रूप में देखते हैं, जिसे वे पूरी बेशर्मी और ज़िद के साथ अपने लिए उम्मीद कि एक किरण के रूप में भी देख रहे हैं। अब चीन क्योंकि वित्तीय और सैन्य मामलों में एक बड़ी महाशक्ति है, अतः अपने क्रूर और बर्बर वामपंथी अधिनायकवादी अत्याचारी चेहरे के प्रदर्शन के लिए वह सबसे उपयुक्त जगह है। वहाँ मानवाधिकार चीनी सशस्त्र बलों के लाल जूतों तले कम्युनिस्ट नेताओं के आपराधिक गिरोह के आदेश पर कुचले जा रहे हैं, और मामूली असहमति की हर एक आवाज को न केवल चुपचाप बलि चढ़ाया जा रहा है, बल्कि जमीन के नीचे गहरे दफन किया जा रहा है कि वह अब फिर कभी ज़िंदा नहीं दिखेगी। जब अपने आप में चीनी व्यवस्था इतनी अमानवीय और सोच और कार्रवाई के स्तर पर आतंकियों जैसी बार्बर है, सोचना मुश्किल नहीं है कि वे अपने राष्ट्र में सर उठाने की कोशिश कर रहे किसी भी संभावित आतंकवादी नेटवर्क के साथ क्या कुछ करते होंगे।
संयोग से, चीन के एक पश्चिमी प्रांत झिंजियांग में मुस्लिम बहुल संख्या में हैं, लगभग एक करोड़ देशी उइगुर मुसलमान यहाँ रहते हैं। यह प्रांत प्राकृतिक संसाधनों से प्रचुर मात्रा में भरा हुआ है, और इस वामपंथी देश की सत्तारूढ़ शक्तियों यह पता है बहुत अच्छी तरह से, कि कैसे इस्लामवाद भी किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के लिए अपने लालच और बर्बर वासना में साम्यवाद के एकदम करीब है। इसलिए, उइगुर मुस्लिम समुदाय को यथासंभव इस्लाम के मूल सिद्धांतों से दूर रखने के लिए, और उनके अंदर राजनीतिक आकांक्षाओं के किसी भी बीज को कुचलने के लिए, चीनी कम्युनिस्ट तानाशाह चुनिंदा तरीक़े से निशानदेही करके, पूरी चालाकी और निर्दयता से हर संभव तरीका इस्तेमाल कर के उइगुर मुसलमानों का लगातार विनाश करते आ रहे हैं। उनके एजेंडे के केंद्र में उइगुर युवाओं के मन में इस्लाम और उसकी मूल मान्यताओं से दूरी पैदा करने के लिए एक मजबूत और सतत किए जाने वाला प्रयास निहित है।
उइगुर जनता के बीच इस्लामी विचार प्रक्रिया को हतोत्साहित करने के लिए, चीनी शासन ने एक बार अपने इमामों को वास्तव में खुली सड़कों पर नृत्य करने के लिए मजबूर किया, वहीं एक दूसरे समय पर पूरी दाढ़ी पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया था, और पिछले कुछ सालों से प्रतिबंधित किया जा रहा था रमजान के रोज़े रखने को, हालांकि कुछ क्षेत्रों में ही। अब, उसी परंपरा के साथ चलते हुए, इस साल चीन ने पूरी तरह से रमजान के रोज़े रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है और वह भी विशेष रूप से मुस्लिम आबादी के सबसे बड़े केंद्र झिंजियांग प्रांत में, जैसा कि एक रिपोर्ट जोकि इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स में प्रकाशित हुई है, में कहा गया है। रिपोर्ट से पता चलता है कि चीनी सरकार की वेबसाइटों में खुले तौर पर इस कड़ी रोज़ाबंदी जिस में नागरिक सेवकों, छात्रों और बच्चों को शामिल किया गया है, की घोषणा की है। ऐसी ही एक सूचना जिसे केंद्रीय झिंजियांग में स्थित कोरला शहर की सरकार की वेबसाइट पर पोस्ट किया है, में कहा गया है कि "पार्टी के सदस्यों, कार्यकर्ताओं, सिविल सेवकों, छात्रों और नाबालिगों को रमजान और अन्य धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने नहीं जाना होगा; और रमजान महीने में, भोजन और पीने के कारोबार बंद नहीं किए जाएंगे। "
हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ दिन पहले कुछ चीनी अधिकारियों के हवाले से खबर दी थी कि रमजान के दौरान झिंजियांग में उपवास पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, लेकिन देश के वामपंथी शासन में उच्च अधिकारियों में इस अत्यधिक 'धर्मनिरपेक्ष' और 'बहु-सांस्कृतिक' क़दम को उठाने की तैयारी की जा चुकी थी।
विश्व उइगुर कांग्रेस, जो चीनी उइगुर मुसलमानों का एक निर्वासित समूह है, ने यह कहते हुए कि "चीन सोचता है कि उइगुर की इस्लामी आस्था बीजिंग नेतृत्व के शासन के लिए एक खतरा है" इस कदम की आलोचना की है, वहीं यह एक ही समय में रोचक और भयावह तथ्य है कि मुर्दा लाशों की तरह मौन हैं इस घोर अन्याय है और मानव अधिकारों के उल्लंघन पर अगर कोई, तो वे हैं भारतीय मुसलमानों के वामपंथी-उदारवादी-सेक्युलर मसीहा जो पूरी बेशर्मी से उइगुर मुसलमानों पर चीन द्वारा किए जा रहे अत्याचार को देख रहे हैं। यह वही लोग हैं जो भारतीय सेना के खिलाफ़ गालियां बकते हुए 'कश्मीर की आज़ादी' के पक्ष में चिल्लाते हैं, जो लगातार 2002 के दंगों के लिए मोदी पर विषवामन करते आ रहे हैं, और साथ ही रात के 2.00 बजे जो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुलवा कर याकूब मेमन की मौत की सजा माफ़ करवाने के लिए अपनी दुष्टता देश को दिखाते हैं। लेकिन अब वे अपने वैचारिक गुरु व्लादिमीर लेनिन की मृत लाश की तरह एक तरफ अंधे-बहरे हुए पड़े हैं। इसी तरह, इमाम बुखारी जो नियमित रूप से जामा मस्जिद की मीनार पर चढ़ कर इज़राइल की सरकार को धमकियाँ देते हैं और रोहिंग्या मुसलमानों के उत्पीड़न के विरोध में फेफड़े फाड़-फाड़ चिल्ला रहे थे बर्मा के खिलाफ़, बिल्कुल बहरा और अंधा रुख़ दिखा रहे हैं इस घटना पर। हमारे सभी प्रयासों के बावजूद, हम अभी भी इन 'वामपंथी-उदारवादी-धर्मनिरपेक्ष इस्लामरक्षकों' की इस चुप्पी का रहस्य समझ नहीं पा रहे हैं। क्या आप इसे समझ पा रहे हैं? 
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1 comment

  • Comment Link Carlosvab Thursday, 29 December 2016 09:30 posted by Carlosvab

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