आयुर्वेद का चमत्कार! छत्तीसगढ़ में मिली २२०० वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक प्रयोगशाला!

01 Jul 16
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Published in Daily Fix

आयुर्वेद का चमत्कार! छत्तीसगढ़ में मिली २२०० वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक प्रयोगशाला! हिन्दुव और भारतीय संस्कृति के दुश्मनों के लिए बुरी ख़बर है. छतीसगढ़ में हुई खुदाई में पता चला कि 2200 साल पहले राजिम में थी आयुर्वेदिक रसायनशाला. 

 

राजिम में हो रही खुदाई में आयुर्वेदिक रसायन शाला होने का प्रमाण मिला है। ईंटों से बनी रसायन शाला में 5 शोध के कमरे हैं, जिनकी दीवारें आज से 2200 वर्ष पूर्व मौर्यकालीन ईंटों से बनी हुईं हैं। इस ईंटों की लंबाई 22, चौड़ाई 21 और मोटाई 9 सेमी है।

पुरातत्वविद डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि रसायन शाला के कुंडों की अंदरुनी दीवारें 10 से 15 सेमी चूने की प्लास्टर वाली है। चूने की प्लास्टर इसलिए की गई है जिससे वे तापरोधक हो सके और कुंडों की गर्मी बाहर न जा सके। इन कुंडों के अंदर से हमें राख और मिट्टी के घरिये मिले हैं।

इन घरियों में शंख, स्वर्ण और चांदी के भस्म बनाए जाते थे, जो आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के काम आते थे। श्री शर्मा ने बताया कि ऐसा आयुर्वेदिक शाला भारत में किसी खुदाई से पहली बार मिली है, जो साबित करती है कि राजिम एक धार्मिक स्थल होने के अलावा बहुत बड़ा आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने का केन्द्र भी था। इसके साथ ही हमें लोहे के शल्य चिकित्सा के औजार भी प्राप्त हुए हैं।

दो हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं मिली

राजिम में हो रही खुदाई में मंगलवार को दो हजार वर्ष से अधिक पुरानी भगवान आदिनाथ की जटाधारी पत्थर की मूर्ति, एलियन की मूर्ति, दो गणेश की पत्थर की प्रतिमा मिली है। भगवान आदिनाथ की पत्थर की मूर्ति ध्यान मुद्रा में बैठे सिर में जटाएं कंधे तक लटक रही है। बाएं ओर चंवर धारनी यक्षणी खड़ी हुई है।

इसके बाद के तीर्थंकरों में घुंघरालू बाल वाली प्रतिमा मिली है। ऐसी प्रतिमा सिरपुर में भी प्राप्त हुई है। भगवान पार्श्वनाथ, भगवान आदिनाथ की प्रतिमा राजिम में मिलने से जाहिर हो गए हैं कि 2 हजार वर्ष पूर्व जैन व्यापारी भी राजिम में रहते थे। क्योंकि राजिम जल व सड़क मार्ग से दक्षिण पूर्व एशिया तथा अरब देशों से जुड़ा हुआ था।

मौर्यकालीन देवी की प्रतिमा मिली

उत्खनन में मौर्यकालीन देवी की प्रतिमा भी प्राप्त हुई है, जिसकी नाक और चेहरा उल्लू के समान हैं। यह उल्लूख देवी की प्रतिमा है। इस प्रतिमा के कान में दोनों तरफ उल्लू के पंजे का निशान हैं तथा सिर के पीछे प्रभावली है। इस मूर्ति को आज से 2200 वर्ष पुरानी बताया जा रहा है।

इस मूर्ति को मूर्ति कला का उत्कृष्ट नमूना भी माना जा रहा है। इसके अलावा एक एलियन (दूसरे ग्रहों) के प्राणी की प्रमिता भी मिली है, जो साबित करती है कि हमारे शास्त्रों में जैसा वर्णन किया गया है कि हमारे संबंध दूसरे ग्रहों से भी थे।

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