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एक बार फिर से साम्प्रदायिक दंगों की आंच मे झुलसता सहारनपुर

30 Jun 15
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Published in Social Harmony

पिछले वर्ष एक धार्मिक स्थल को लेकर हुये सिक्ख-मुस्लिम साम्प्रदायिक दंगों के बाद एक बार फिर से सहारनपुर साम्प्रदायिक दंगों को लेकर सुर्खियों मे है, सहारनपुर में छेड़छाड़ की घटना ने सांप्रदायिक रूप ले लिया।

देर रात हुए बवाल में पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां फटकारीं तो गुस्साई भीड़ ने पथराव और फायरिंग कर दी। फायरिंग में एसएचओ समेत तीन पुलिसकर्मी और एक युवक घायल हो गया। मेरठ ले जाते समय फायरिंग और बवाल करते मुस्लिम समुदाय के एक युवक वसीम की मौत हो गई। घटना के मद्देनजर मेरठ और मुजफ्फरनगर में अलर्ट कर दिया गया।

शनिवार को रामपुर के मोहल्ला मनिहारान में एक हिंदू लड़की को मुस्लिम संप्रदाय के युवकों ने छेड़ दिया। इस पर दोनों समुदायों में विवाद हो गया। दोनों ओर से पथराव हुआ, बाद में मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए और हंगामा करने लगे। पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो पुलिस ने लाठी फटकार दी। इस पर भीड़ की ओर से फायरिंग और पथराव शुरू हो गया।

इस फायरिंग में एसएचओ रामपुर मनिहारान प्रेमवीर राणा, दरोगा मांगेराम कर्दम, सिपाही सुनील और एक युवक व्यक्ति वसीम को गोली लगी।एसएचओ को ला रही गाड़ी भी ट्रक से बचने के चक्कर में रास्ते में पलट गई जिसमें एसएचओ को और चोट आ गई। साथ ही गाड़ी में सवार कई अन्य पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए। वसीम की हालत गंभीर देखकर उसे भी हायर सेंटर रेफर कर दिया गया लेकिन मेरठ ले जाते वक्त रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। 

उधर, रामपुर मनिहारान में भीड़ ने हाईवे जाम कर दिया। एसएसपी नितिन तिवारी भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। बाद में ट्रैफिक को भी चालू कर दिया गया। इसके बाद डीआईजी अशोक राघव भी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा की दृष्टि से आरएएफ, पीएसी और भारी संख्या में पुलिस को तैनात किया गया है। सहारनपुर समेत मुजफ्फरनगर में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। देर रात तक वरिष्ठ अफसर रामपुर में ही कैंप कर रहे थे। 

एक के बाद एक श्रंखलाबद्द हो रहे साम्प्रदायिक दंगों से यूपी सरकार पर सवालिया निशान लग जाता है। सरकार का कार्य करने के तरीकों से भी लोगो मे रोष उपजा है। सम्प्रदाय विशेष (मुसलमान) की लडकियों को छात्रवृति का मामला हो या फिर मुजफ्फरनगर दंगा पिडितों के नाम पर सिर्फ मुसलमानों को सरकारी सहायता पहुंचाना, राज्य सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिये बहुसंख्य हिन्दुओं की कभी परवाह नहीं की, इससे हिन्दुओं के मन मे सरकार के प्रति रोष भर गया है।

समाजवादी सरकार को सोचना होगा कि वह बहुसंख्यकों की अवहेलना एक दिन पार्टी को भारी पडेगी,मुस्लिम तुष्टीकरण की कीमत उसे चुकानी ही होगी।

 

 

 

 

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