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बांग्लादेशी घुसपैठ और तस्करी

07 Jul 15
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Published in National Security

बांग्लादेश मे बैठे भारत विरोधी तत्वों द्वारा पाकिस्तान तथा बांग्लादेशी आतंकी गुटों के बीच 1998 में हुये जिहाद समझौते को बाखुबी अंजाम दिया जा रहा है।

इनका मकसद है उत्तर भारत को शेष भारत से अलग करके एक इस्लामी गलियारा बनाना। यह गलियारा आसाम, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश होते हुए बांग्लादेश व पाकिस्तान को जोडेगा। इस षडयंत्र को अंजाम देने के लिये बांगलादेश में बैठे उग्रवादी संगठनों द्वारा 6,000 बांग्लादेशीयो को अवैध रूप से भारत भेजा जा रहा है ! भारत मे घुस कर ये लोग पहले यहाँ के रहवासियोँ के मवेशियो को मारते हैं फिर उनके घरो तथा स्त्रियो पर हमला करते हैं। मजबूर हो कर यहाँ के रहवासियो को सस्ते दामों में अपनी जमीन जायदाद इन्ही लोगो के हाथों बेच कर पलायन करना पडता है। इस तरह उन इलाको में ये लोग भारतीयों की जीविका पर कब्जा करते जा रहे हैं। ये घुसपैठिये 15,000 करोड रुपये सालाना बांग्लादेश भेज रहे हैं। कुछ इलाको में इनकी तादाद जनसंख्या का 70% से भी ज्यादा हो चुकी है। चुनावों मे ये लोग किसी पार्टी विशेष को वोट देते हैं जो इनको राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध करवा कर इन्हे राजनीतिक संरक्षण देती है। ये लोग हिंदु विरोधी दंगे करके सीमा पार चले जाते हैं। इनके तार माओवादीयो से भी जुडे हैँ तथा ये लोग आतंकवादीयो को भी पनाह देते हैं। इनकी मदद से 20,000 गायें रोज सीमा पार काटने के लिये भेजी जा रही हैं। लगभग 3000 से ज्यादा बांग्लादेशी आतंकवादी भारत में सक्रिय हैं। सोचो अगर किसी दिन चिकन नेक (जमीन का वह टुकडा जो शेष भारत को पुर्वोत्तर से जोडता है) को इन बांग्लादेशीयो ने अलग कर दिया तो भारत का पुर्वोत्तर से सम्पर्क टूट जायेगा।

कल बांग्लादेश के सबसे बड़े अख़बार "प्रथम आलो" में छपा इस खबर का हैडिंग है ..............

"भारतीय गाय कम आने की वजह से चमड़ा उद्योग और इससे जुड़े बाज़ार प्रभावित" !!
भारतीय सीमा कोरिडोर से गाय का आना कम हो गया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो अगले कुछ महीनो में गाय का आना पूरी तरह बंद हो जायेगा। ढाका के गोमांस व्यापारियों का कहना है 'भारतीय गाय आना बंद होने से बाज़ार प्रभावित हुआ है, खुदरा और थोक बाज़ार में गाय की कीमत 30% से 40% बढ़ गया है. औए गोमांस की कीमत प्रति किलो 50 से 80 रूपए बढ़ गया है। 
गाय आना बंद हो गया तो इस व्यापार से जुड़े हज़ारों लोग बेकार हो जायेंगे। बॉर्डर के पास जितने भी गाय का बाज़ार था सब बंद हो जायेगा। इससे देश के चमड़ा उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित होगा, उनके उत्पादन आधा हो जायेगा। 
हर वर्ष औसतन 20 लाख गाय भारत से आती है, जिसका व्यापर करीब 300 करोड़ का है। २०१३ में गाय आया था 23 लाख 74 हज़ार, २०१४ में 20 लाख 32 हज़ार यानी हर महीने 2 लाख गाय आया करता था पर इस वर्ष फरबरी से गाय आना कम हुआ। जहाँ जनवरी में 1 लाख गाय आया था, फरवरी में आया 48,450, और मार्च में 44,945, और मई के महीने में 20,000 से ज्यादा गाय नही आया। 
2 फरबरी को भारत के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने BSF को गाय की तस्करी रोकने का आदेश दिया था तबसे सीमा में कड़ी कारवाई शुरू हुआ है। 
बांग्लादेश में प्रति वर्ष 50 लाख गाय को काटा जाता है जिसका आधा हिस्सा भारत से आता है !

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