दादरी की बच्चियों की धर्म के कारण तस्करी, सिगरेट से जलाई गईं, नाखून उखाड़े गए; आपने कहीं सुना?

14 Jun 16
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दादरी - जी हाँ, वही 'बेचारा निरीह गोमांस-भक्षक हिन्दू-उत्पीड़ित शहीद अखलाक़' वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश वाला दादरी अब इतना मशहूर तो हो ही चुका है कि अंतर्राष्ट्रीय नक्शों पर उसकी पहचान बन गई है

देश के वामपंथी-उदारवादी-सेक्युलर खेमे की कृपा से जिसने भारत को इस आधार पर अपमानित और बदनाम करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी कि यहाँ पर सिर्फ हिन्दू न होने की वजह से धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया जाता है। 

हमने देखा है कि लगभग पूरा एक साल तक देश के मीडिया-बुद्धिजीवी-लेखक-पत्रकार-अभिनेता और न जाने कौन कौन दिन में कम से कम एक बार अखबारों और टीवी चैनलों पर दादरी का नाम लेने का मज़हबी क़ायदा ईमान से निभाते रहे।
आज वही दादरी स्थानीय हल्कों में तनाव की धाराएँ उत्पन्न कर रहा है, दो मासूम बच्चियों के धार्मिक आधार पर भयानक उत्पीड़न के कारण। लेकिन हैरत है कि हमें इस घटना के बार में राष्ट्रीय और स्थानीय किसी भी मीडिया उपक्रम के माध्यम से कोई जानकारी प्रपट नहीं हो पा रही है।
न ही हम ने इस बारे में वामपंथी-उदारवादी-सेक्युलर गिरोह के किसी सदस्य को इस बारे में उन टीवी बहसों में इस मुद्दे को एक बार भी उठाते देखा, जिस पर वे अपनी चमकदार उपस्थिती से रोज़ाना मोहक छटा बिखेरते हैं।
जब हमें इस बारे में पता चला, हमने और जानकारी हासिल करने के लिए हर संभाव सभी मीडिया उपक्रमों को खंगाल मारा, लेकिन दुर्भाग्य है कि मात्र हिन्दी दैनिक हिंदुस्तान के 7 जून 2016 के स्थानीय (एनसीआर) पन्ने पर एक छोटी सी दो कॉलम की सूचना इस बारे में छपी थी।
हमें प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो बच्चों की माँ श्रीमती नूतन दिल्ली के विकास नगर इलाके में रहा करती थीं। नूतन के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, जिसके कारण अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवा पाने में वे असमर्थ थीं।
निर्धन परिवार से होने के बावजूद नूतन के मन में अपनी दोनों बच्चियों को अच्छी शिक्षा दिलवाने का दृढ़ निश्चय ज़रूर था, ताकि वे आगे बढ़ सकें और अपने जीवन में सफल हो सकें।
विकास नगर, दिल्ली के उसी इलाक़े में नूतन की भेंट देवराज नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें बताया कि वह निर्धन परिवारों के बच्चों के लिए चैरिटेबल शेल्टर होम चलता है, जहां उन्हें मुफ्त शिक्षा और रहने-खाने की सुविधा दी जाती है। देवराज का यह चैरिटेबल शेल्टर होम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उसी दादरी तहसील के गाँव चिपियाना खुर्द में स्थित था।
देवराज के नेक इरादों पर विश्वास तथा उसके सहयोगी रवैये के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए, अपनी आँखों में बच्चियों के अच्छे भविष्य के सपने देखते हुए नूतन ने आज से कोई तीन वर्ष पूर्व दोनों बच्चियों को देवराज के हवाले कर दिया।
कुछ समय बाद, जब नूतन अपनी बच्चियों से मिलने दादरी पहुँचीं, तो वे यह देख कर आश्चर्यचकित रह गईं कि उस चैरिटेबल शेल्टर होम में उन में से एक भी नहीं थी। पूछे जाने पर देवराज ने बताया कि वे दोनों बाहर के किसी शहर में स्थित एक प्रख्यात ईसाई मिशनरी कॉन्वेंट में आराम से शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और जल्दी ही वापस आ जाएंगी।
नूतन यह सुन कर बुरी तरह सकते में आ गईं, लेकिन उनके पास देवराज के अलावा और कोई रास्ता नहीं था अपनी बच्चियों तक पहुँचने का, इसलिए मजबूर हो कर उन्होंने उस पर ही यकीन करना बेहतर समझा।
कुछ समय बाद देवराज ने चिपियाना खुर्द गाँव में ही नूतन को रहने के लिए एक मकान दिलवा दिया, और वह एक दिन अपनी बेटियों को फिर से देखने की उम्मीद में वहीं रहने लगीं। वक़्त गुज़रता गया, और धीरे-धीरे नूतन को वहाँ रहते तीन साल बीत गए लेकिन देवराज से तमान मिन्नतें करने और हाथ जोड़ने के बाद भी उन्हें उनकी बेटियों की शक़्ल तक नहीं दिखाई गई।
देवराज से सारी उम्मीदें ख़त्म होने के बाद, आख़िरकार नूतन और उनके पति ने चाइल्ड लाइन की मदद से अपनी बेटियों की खोज प्रारम्भ की।
आख़िरकार उन्हें अपनी बच्चियों के ठिकाने के बारे में सुराग हाथ लगा, और चाइल्ड लाइन की मदद से किए गए अथक प्रयासों के बाद उनकी एक बच्ची मेरठ से और दूसरी देहारादून से बरामद हुई।
और जब दोनों बच्चियाँ नूतन को वापस मिलीं, तो उन्होंने देवराज और उसके मिशनरी गिरोह की दिल दहलाने वाली असलियत बयान की। उन्होंने बताया कि देवराज और उसके साथी उस चैरिटेबल शेल्टर होम का प्रयोग गरीब बच्चों का धर्मांतरण कर के उन्हें ईसाई बनाने के लिए करते थे।
उम्र में बेहद छोटी होने के बावजूद दोनों बहनों ने अपना धर्म छोड़ने से इंकार कर दिया, और तब उनकी यातनाओं और उत्पीड़न का लंबा दौर प्रारम्भ हुआ।
दोनों बच्चियों को दूर कहीं अलग-अलग जगह ले जाया गया, और उन पर वे अमानवीय अत्याचार ढाए गए जिसे सुन कर रूह काँप जाए!
हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म ग्रहण करने के लिए उन बहनों में से एक को सिगरेट से जलाया गया, जबकि दूसरे कि उँगलियों के नाखून इलैक्ट्रिक प्लायर्स से उखाड़ लिए गए!
इससे भी बढ़ कर यह, कि दादरी में देवराज और ईसाई मिशनरी नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे लोग नूतन और उसके परिवार को अपना मुंह बंद रखने अथवा गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ लगातार दे रहे हैं। बुरी तरह से टूटी हुई और व्यथित नूतन ने अब दादरी के एसडीएम से इस मामले में हस्तक्षेप अरने और उचित कार्रवाई करने की प्रार्थना की है।
वेटिकन-सऊदी-आईएसआई द्वारा पोषित हिन्दू-विरोधी वामपंथी-उदरवादी-सेक्युलर पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के गिरोह इस पर क्यों खामोश हैं यह तो समझ में आता है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि दादरी क्षेत्र के तथाकथित हिन्दुत्व योद्धा और संघ प्रचारक इस समय कहाँ हैं?
क्या वे भी वेटिकन द्वारा प्रायोजित किसी आरामदेह स्थान पर आराम कर रहे हैं, या 2014 में मिली मोदी की प्रचंड विजय की दावत में अभी तक स्वादिष्ट पकवान उड़ा रहे हैं? क्या भाजपा-संघ युति इतनी मूर्ख है कि इसे लगता है इसी तरह उत्तर प्रदेश के हिन्दू इन्हें 2017 में सत्ता में वापस लेकर आएंगे? हमें लगता है हाँ, यह वास्तव में इतने ही मूर्ख हैं!!

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