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व्यापम का बवंडर्

08 Jul 15
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Published in Corruption

जिस व्यापम कि गूँज आज हर जगह सुनाई दे रही इसकी पहली आहट 2009 मे तब सुनी गयी थी जब आनंद राय नाम के एख शख्स ने पहली बार व्यापम भर्ती मे शुरु फर्जीवाडे कि जाँच कि माँग के लिए भोपाल उच्च न्यायालय मे एक जनहित याचिका दाखिल किया।

इस याचिका पर संज्ञान लेकर तुरंत एक जाँच आयोग का गठन हुआ, इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट २०११ मे दे दी जिसे आधार बनाकर राज्य सरकार ने धडाधड आरोपीयो कि धरपकड भी शुरु कर दी ,इस कार्यवाही के लपेटे मे तब के तकनिकी शिक्षामंत्री तक को नही छोडा गया ,
आरोपीयो से पुछताछ मे रोज नयी और चौकानेवाली जानकारी मिल रही थी।
पता चला राज्य मे ये फर्जीवाडा 2004 से शुरु था , एक गिरोह इन सबके पीछे था, एक के बदले दुसरा विधार्थी परीक्षा मे बैठ जाता था , कुछ चुनिंदा लोगो को विशेष रोल नंबर देकर सामुहिक नकल कराई जाती थी और सबसे खतरनाक का विद्यार्थीयो के OMR उत्तर पृष्ट से सीधे उनके नंबर बढाना, बिना अंदरुनी मिलीभगत के ये सब किसी बाहरी गिरोह के बूते का नही था।

इशारा साफ था इसकी जड़ें व्यापम के अंदर तक धसी है।
इसी को ध्यान मे रखकर 2013 मे एक S.I.T का गठन भी किया गया जिसने आगे और भी विस्फोटक खुलासे किये...
जाँच मे S.I.T ने पाया ये फर्जीवाडा व्यापम द्वारा आयोजित सिर्फ P.M.T तक ना होकर P.G exams , फुड इंसपेक्टर , आरक्षक , मिल्क फेडरेशन जैसे अन्य परीक्षाओ मे भी हूआ था।इस बात के पुख्ता सुबूत मिल गये थे कि व्यापम के अंदर का सिस्टम किसी बाहरी गिरोह से मिलकर ये सब कर रहा था। 

इसके बाद शुरु हुआ बडी मछलीयो को पकडने का काम
उनमे सबसे बडी मछली थे म.प्र के तकनिकी शिक्षामंत्री जिनके अंतर्गत व्यापम काम करता था , इसके अलावा लक्ष्मीनारायण शर्मा , डॉ विनोद भंडारी , डाँ जगदिश सागर जो व्यापम का कुछ भीतरी लोगो से मिलकर medicle students के लिए खास रोल नंबर एलॉट करवाते थे ताकी सामूहिक नकल हो।
मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के ओएसडी O.P शुक्ला, व्यापम के परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी , students का OMR ans sheets मे हेरफेर कर नंबर बढाने वाले सिस्टम एनालिस्ट नितीन मर्हेद्र और अजय सेन , व्यापम के एक और अधिकारी C.K मिश्रा जो डाँ भंडारी और डाँ सागर से पैसे लेकर उनके चहेते students को एक खाल रोल नंबर अलॉट करवाते थे ।

प्रदेश के एक बडे खनन कारोबारी सुधीर शर्मा ,राज्यपाल रामनरेश यादव उनके पुत्र शैलेष यादव । इन सबके साथ फर्जीवाडे से मेडिकल व अन्य क्षेत्रो मे दाखिल हुए सैकडो बोगस students कि भी धरपकड हुई।इसके अलावा एक अंतराज्यीय गिरोह का भी भांडाफोड हुआ जो असली students कि जगह दुसरे राज्यो के medical students से परीक्षा दिलवाता था ।

इन सबके अलावा एक कमाल कि घटना भी घटी , व्यापम घोटाले कि जाँच मे मदद हेतु रखा गया आईटी कंसलटेंट प्रशांत पाण्डेय भी पैसो के बदले जाँच कि रिपोर्ट लीक करते रंगे हाथ पकडा गया,
और बस यही से इस घटना का सबसे नाटकिय मोड आया! हुआ यूँ कि प्रशांत पाण्डेय दिग्विजय सिंह से जा मिला और दिग्गीराजा को म.प्र मे बीते १५ साल से बंजर पडी उनकी राजनिती कि फसल फिर से लहलहाने का एक शानदार मौका दिखाई देने लगा।

अपने इसी अतिउत्साह के चलते दिग्विजय सिंह प्रशांत पाण्डेय द्वारा व्यापम घोटाले के आरोपीयो कि १५ पेज कि exel sheet S.T.F से पहले ही बकायदा शपथपत्र के साथ जाँच आयोग के अध्यक्ष के पास जमा करवा आये! जाँच समिती ने भी इसपर संज्ञान लेकर S.T.F और दिग्विजय र्सिह दोनो कि exel sheet कि फॉरेंसिक जाँच करवाई ,और नतिजे मे जस्टिस खानविलकर ने दिग्विजय सिंह कि exel sheet फर्जी मान रद्द कर दिया।इससे भन्नाए दिग्विजय सिंह ने व्यापम घोटाले के जाँच के लिए C.B.I कि माँग करते हुए , भोपाल उच्च न्यायालय मे एक याचिका भी दायर कि जिसे माननीय उच्‍चन्यायलय ने खारीज कर S.T.F के कार्य को ही संतोषप्रद माना, और अभी भी यही जाँच टीम व्यापम घोटाले पर जाँच मे जुटी है।


मित्रो ,दिग्विजय सिंह १९९२ से २००२ तक म. प्र के मुख्यमंत्री रहे है , और आंकडे गवाह है २००२ तक मप्र कि गिनती बीमारु राज्यो मे होती थी , वहाँ कि जनता सडक , बिजली और पानी जैसी आधारभूत सुविधाओ से भी मोहताज थी लेकिन २००२ के बाद जब से शिवराज सिंह वहाँ के मुख्यमंत्री बने है तब से प्रदेश कि GDP growth rate 121% कि दर से बडी है जिसका नतिजा है आज मध्यप्रदेश कि विकास दर 11.98% हो गयी है , आज मप्र कि कृषि विकास दर 24.99% तक पहूँच गयी है।

कुल मिलाकर कहा जाये तो एक प्रशासक के रुप मे शिवराज कि उपलब्धीयाँ दिग्विजय सिंह से कही ज्यादा है।
अब सवाल ये है कि अगर शिवराज सिंह वाकई व्यापम घोटाले मे शामील होते तो क्या राज्यपाल और मंत्रीयो तक को जेल भिजवाते?
आखिर उन्होने क्यों इस मामले मे तुरंत S.I.T का गठन कर दिया जबकी वे चाहते तो छोटे मोटे लोगो को पकडकर ही मामले को रफादफा कर देते जबकी दुनिया जानती है व्यापाम मामले मे अभी तक हजारो जेल जा चुके है और मामला कि जाँच अभी भी शुरु है ?


यहाँ एक बात और गौर करनेवाली है , शिवाय विपक्षीयो के आज तक एक भी पकडे गये आरोपी ने प्रत्यक्ष रुप से शिवराज सिंह का नाम नही लिया है!
अब मुख्य मुद्दा ये है कि क्या medical etc के प्रश्नपत्र अकेले मप्र या व्यापम द्‍वारा संचालित होनेवाले परीक्षाओ मे लीक हुए है?
आप भी जानते होंगे इस किस्म कि घटनाऐ आज देश के लगभग कोने मे आम है , अभी हाल ही मे उत्तरप्रदेश मे SDM प्रवेश परीक्षा मे 86 मे से 54 चयनित उम्मीदवार एक समुदाय विशेष (यादव) का होना क्या एक संयोग भर है ?

कुल मिलाकर बात सिर्फ इतनी है देशभर मे शिक्षा माफिया इस किस्म के फर्जीवाडे मे संलग्न है ,
अत: मात्र व्यापम घोटाले को इसकी शुरुवात मानना ठिक नही , शिवराज सिंह शायद पहले इंसान है जिन्होने इस किस्म के फर्जीवाडे का भांडा फोडने का नैतिक साहस दिखाया और रही बात व्यापम मामले के आरोपीयो कि मौत का तो बेशक इसकी भी CBI जाँच हो जाये ताकी देश कि जनता भी उन मौतो का सच जान ले। 

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