Sunday, 25 January 2015 17:00

क्यों नहीं घट रहे डीजल - पेट्रोल के मूल्य ?

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कुछ लोग चाहते हैं कि पेट्रोल और डीजल भी अपने उच्च-स्तर के तिहाई के आस-पास हो जाने चाहिए, जैसा कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में हुआ है ।

पिछले कुछ वक्‍़त से लगातार एक आरोप भाजपा-सरकार पर लगाया जा रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरेल (1 बैरल = लगभग 158.987 लीटर) से घटकर 48 डॉलर प्रति बैरेल होने के अनुरूप देश में डीजल–पैट्रोल की क़ीमतें कम नहीं की गईं। इस बारे में यह जानना ज़रूरी है कि भारतीय बाज़ार में बिकते तेल की कीमत के 3 मुख्य अंग हैं :
   1. कच्चे-तेल की कीमत.
   2. कच्चे तेल को प्रयोग किये जा सकने योग्य पेट्रोल/डीजल में बदलने में होने वाला व्यय।
       (जिसमें सभी रिफाइनरी के कर्मचारियो के वेतन समेत सभी खर्चे और परिष्कृत तेल को अलग-अलग जगह भेजने का खर्चा भी सम्मिलित होता है)।
   3. केन्द्रीय और राज्य सरकारों के विभिन्न आयात-कर, बिक्रीकर और उत्पादन कर।

अलग-अलग समय पर कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत भारतीय रूपये में इस प्रकार रही (इसमें भारतीय रुपए के सापेक्ष अमेरिकन डॉलर की कीमत भी एक महत्वपूर्ण कारक है):

वर्ष                   
प्रति बैरल मूल्य        
प्रति लीटर मूल्य    
जनवरी 2010 रू 3541.88 रू 22.28
जनवरी 2011 रू 4205.30 रू 26.45
जनवरी 2012 रू 5475.69 रू 34.44
जनवरी 2013 रू 5705.06 रू 35.88
सितम्बर-2013 रू 6928.11 रू 43.58
जनवरी 2014 रू 6353.32 रू 39.96
मई 2014 रू 6274.31 रू 39.46
दिसम्बर 2014 रू 3797.15 रू 23.88

 

यह तो रहा कच्चे तेल का मूल्य।
इसके बाद तेल-संशोधन का व्यय (तेल कम्पनीयों के विभिन्न प्रकार के सभी व्यय) जोड़कर जो कीमत आती है उस पर विभिन्न आयात-कर, बिक्रीकर और उत्पादन कर और रिटेलर का लाभ जोड़कर आने वाला मूल्य पेट्रोल/डीजल का ख़ुदरा मूल्य या बाज़ार मूल्य होता है।

1.) सर्वप्रथम कच्चे तेल की कीमत पर 2.5% कस्टम ड्यूटी लगती है।
2.) इसके बाद पैट्रोल व डीजल के रूप में संशोधित करने के बाद जो कीमत आती है उसपर केन्द्र सरकार Rs 6.35 प्रति लीटर Basic Cenvat Duty,
3.) Rs 6.00 प्रति लीटर Excise Duty,
4.) Rs 2.00 प्रति लीटर Special Excise Duty Towards Highway Cess (यह समस्त दरें प्रतिशत में नहीं होती हैं बल्कि प्रति लीटर तयशुदा होती हैं),
5.) तथा इन सबके कुल जोड़ पर फिर से 3 प्रतिशत Education Cess लगा कर जोड़ा जाता है।
6.) अब इस कुल रकम पर प्रत्येक प्रदेश सरकार अपने स्तर पर VAT (जिसे पहले Sales Tax के नाम से जाना जाता था) लगाती हैं, जैसे कि दिल्ली में 20% VAT लगाया जाता है।

इस प्रकार जो योगफल प्राप्‍त होता है उस पर पेट्रोल पंपों आदि रिटेल विक्रेताओं का मुनाफा जोड़कर जो रकम प्राप्त होती है, वह डीजल/पेट्रोल का ख़ुदरा मूल्य होता है जिसे चुका कर हम लोग अपनी बाइक या कार में पैट्रोल डलवाते हैं। जहां तक कच्चे तेल के मूल्य का सवाल है, मई-2014 से दिसम्बर-2014 तक यह मूल्य सिर्फ रू 15.58 प्रति लीटर कम हुआ है, और सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की ख़ुदरा क़ीमत लगभग इतनी ही कम कर दी है

वहीं दूसरी ओर लगातार गिरती कीमतों के बीच भारतीय तेल कम्पनियां अपने ऊंची दरों पर ख़रीद कर रखे गए कच्चे तेल के पूर्ववर्ती स्टाक की गिरती कीमत की वजह से भी एक बड़ा वित्तीय नुक्‍़सान झेलने को मजबूर हैं। इस जमा स्टाक की गिरती कीमत की वजह से होने वाले नुक्सान की भरपाई के लिये भी गिरती कीमतों का पूरा फायदा सिर्फ ग्राहकों को नहीं दिया जा सकता, चूंकि कंपनियां एक हद से अधिक वित्तीय नुक्‍़सान सहन करने की स्थिति में नहीं हैं।

 

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