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Wednesday, 17 June 2015 00:00

मीडिया का असली चेहरा कौनसा है ?

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आज शाम को जब मैं टीवी पर न्यूज़ देख रहा तब बड़ी अज़ीब व हास्यास्पद स्थिति पैदा हों गई।

मैं पहले उस टीवी स्क्रीन के बारे में आपको बता दूँ जो किसी भी न्यूज़ चैनल पर दिखाई देती है । दरअसल समाचार चैनल टीवी स्क्रीन को दो तीन भागों में बाँट देते हैं, एक विंडो का मुख्य भाग होता है जहाँ ख़बर का विडियो दिखाई देता है। दूसरा भाग वह पट्टी है जो मुख्य विंडो के नीचे होती है जिसमे ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी चलती रहती है या फिर सारा दिन प्रसारित होने वाले न्यूज बारी-बारी से ब्लिंक होते रहते हैं। मसला दरअसल यह है कि आज शाम से ही सभी न्यूज़ चैनलों पर उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे हमलों की ख़बर प्रमुखता से आ रही थी। निसंदेह यह बहुत ही निंदनीय घटना है। समाचर प्रस्तुतकर्ता लगातार उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को कोस रहे थे। यह गिन-गिन कर बताया जा रहा था कि पिछले दिनों यू।पी। में कहाँ व कितने अपराध हुए हैं। ये सभी चल रहा था तभी एक लंबा विज्ञापन मुख्य विंडो पर प्रकट होता है जिसमे यू।पी। सरकार के विकास कार्यों का महिमामंडन था । इस विज्ञापन ने मुख्य समाचार जो कि एक पत्रकार से मारपीट के बाद मोटर-साईकिल के पीछे बाँध कर घसीटे जाने का था, को नीचे की पट्टी पर धकेल दिया । टीवी की स्क्रीन पर दो जगह पर दो विपरीत बाते चल रही थीं -
मुख्य विंडो पर विज्ञापन के रूप में -:
यू।पी। में सुराज आया है …लोगों को रोजगार मिले … सड़क निर्माण… शिक्षा, चिकित्सा, आवास … अमन चैन कायम हुआ… मजदूरों, किसानों, व्यापारियों के हित की रक्षा …कानून व्यवस्था तथा पक्षपात रहित न्याय लोगों को मिला है …इत्यादि ।
नीचे की पट्टी पर -:
पत्रकार पर हमला … लोकतंत्र पर पर हमला … जनता की आवाज पर हमला …जंगलराज …इत्यादि ।
ये दोनों संदेश एक ही स्क्रीन पर एक साथ चल रहे थे । मैं दोनों में किसी को सही या गलत नहीं ठहरा रहा मैं तो यह जानना चाह रहा हूँ कि इसमें से मीडिया का असली चेहरा कौनसा है ?
एक पखवाड़े में उत्तर प्रदेश में तीन पत्रकारों पर हमले हो चुके हैं । शाहजहांपुर में तो एक पत्रकार को जिन्दा जला दिया गया । इस ह्त्या में यू।पी। सरकार के मंत्री राममूर्ति वर्मा पर FIR दर्ज करवाई गयी है । समाचार है की मृतक जगेन्द्र स्वतंत्र पत्रकार था जो सोशल मीडिया पर मंत्री राममूर्ति के काले कारनामे उजागर कर रहा था । जगेन्द्र सिंह सोशल मीडिया पर अपनी ह्त्या की आशंका जता चूका था । जगेन्द्र सिंह ने राममूर्ति के खिलाफ अवैध खनन और जमीन पर कब्जाने को लेकर एक पोस्ट फेसबुक पर डाला था । राममूर्ति और पांच पुलिस वालो पर आरोप के बाद सीबीआई जांच के साथ मंत्री के त्यागपत्र की मांग की जा रही है, लेकिन सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट मना त्यागपत्र के लिए स्पष्ट मना कर दिया है, यू।पी। सरकार का कहना है जाँच होने के बाद ही मंत्री पर कोइ फैसला लिया जायेगा तब तक राममूर्ति अपने पद पर बने रहेंगे ।
इस तरह कानपुर में भी एक पत्रकार पर हमला हुआ ।
15 जून को पीलीभीत में एक पत्रकार को फोन कर लूट का रिपोर्ट कवर करने के बहाने बुलाया । जब वो वहां पहुंचा तो वहां खड़े चार लोगों ने उसकी बुरी तरह पिटाई करके मोटर-साईकिल के पीछे बाँध कर 100 मीटर तक घसीटा ।
घटनाओं से स्पष्ट हो जाता है कि समाजवादी सरकार ऐसा करके पत्रकारों में डर पैदा करना चाहती है ताकी वो सरकार के खिलाफ कुछ भी लिखने से बचें । मीडिया का एक बड़ा समूह आर्थिक और सामाजिक दबावों की वजह से सरकार के साथ हो गया है लेकिन जो गिने चुने विद्रोही हो चुके लोग हैं उन्हें एक-एक कर निशाना बनाया जा रहा है ।

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