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Sunday, 26 April 2015 06:42

Nepal earthquake tragedy exposes Soul Vultures

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Christian evangelical organisations work for conversion, not charity, suggested Sarsanghchalak Mohan Bhagvat in what became a raging controversy. He stands vindicated time and again with the acts of Soul Harvesters feasting upon the heathens with their book and their bigotry, the latest of which can be seen post Nepal disaster these days.

FCRA 2010 is a national security legislation to regulate the acceptance and utilization of Foreign Contribution (FC). As defined in Section 2(1)(h) of FCRA, 2010, "foreign contribution" means the donation, delivery or transfer made by any foreign source to any India based organisation.

AAP के अजीबों गरीब कारनामे सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। पैसे देकर पत्थर फिकवाने से लेकर अंडे और स्याही फिकवाने तक मीडिया की बहसों का हिस्सा बने रहते हैं। पर इस बार उनका राजनीतिक स्टंट बुरी तरह से गलत चला गया जब इसमें एक इंसान की जान चली गयी। जो तथ्य सामने आये हैं, वे AAP की नियत पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। उनमें से कुछ संलग्न हैं :

1) सुबह , केजरीवाल ने पुलिस से मीडिया को रैली में आने नहीं देने को कहा।

2) गजेन्द्र सिंह एक स्थापित व्यवसायी थे जिनकी खुद की वेबसाइट है , ना की वो एक किसान थे।

3) ये एक रहस्य है की जो इंसान पेड़ पर लटक कर अपनी जान देना चाहता था , उसने अपने साथ में झाड़ू क्यों रखी थी?

(गजेन्द्र के हावभाव को देखकर लगता नहीं की वह आत्महत्या करने गया था)

4) जब उसने अपने आप को लटकाया , कुमार विश्वास उस वक्त भाषण दे रहे थे, उन्होंने कहा - "लटक गया?"

5) गजेन्द्र सिंह की मृत्यु के बाद भी AAP नेता और केजरीवाल ने रैली और बाकी किसानो को उकसाने का काम जारी रखा

6) जो सुसाइड नोट था उसमे नाम 'उपेन्द्र' को काटकर गजेन्द्र लिखा गया । क्या कोई आत्महत्या करने जा रहा व्यक्ति अपना ही नाम गलत लिख सकता है ? खैर , फिर भी कुमार विश्वास ने भावनात्मक मोड़ देने के लिए उसे मंच से पढ़ा।

7) गजेन्द्र के घरवालों ने खुलासा किया की उनकी मनीष सिसोदिया के साथ बातचीत चल रही थी और उनसे 11 बजे(रैली के ठीक पहले ) मिले भी थे

8 ) गजेन्द्र के परिवार का कहना है की वो हैंडराइटिंग (जो सुसाइड नोट पर थी) , वो उनकी नहीं थी

9) "वो एक सकारात्मक और मज़बूत व्यक्ति था, ऐसा लगता है उन्हें रैली में किसी ने भड़काया था " - सुरेन्द्र सिंह , गजेन्द्र के रिश्तेदार.

"गजेंद्र तो बस किसानों की अवाज़ उठाना चाहते थे, AAP के लोगों ने उन्हें ये कदम लेने पर उकसाया" - गजेन्द्र के परिवारवाले |

 

10) पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने खुद माना है की 2011 में जब केजरीवाल उनसे मिले थे तब सरदेसाई ने केजरीवाल को सलाह दी थी की दिल्ली में 'तहरीर चौक' जैसी परिस्थिति पैदा करे तभी जनलोकपाल आन्दोलन सफल होगा. दिल्ली के एक मौलाना ने भी माना की केजरीवाल उनसे मिले थे और बहुत सारे लोगों का इंतजाम करने को कहा था और यह भी कहा था की वे दिल्ली में 'तहरीर चौक' जैसी परिस्थिति चाहते है.

इससे साफ़ है की केजरीवाल अपने आन्दोलन को सफल बनाने के लिए ड्रामा परिस्थिति पैदा करते है और शायद इस बार गजेन्द्र सिंह भी इस प्लान का हिस्सा था.

लोगों का कहना है की गजेन्द्र सिंह को बोला गया था की आत्महत्या की एक्टिंग करे और फ़ासी के लिए गमछे को इस्तेमाल करने को कहा गया था और प्लान ये था की 'आप' के कार्यकर्ता तुरंत गजेन्द्र को बचा लेंगे और फिर उसे मंच पर लाया जायेगा.

लेकिन जैसा तय था उसके उलट हो गया और गजेन्द्र सच में मर गया.


 श्री गजेन्द्र तो एक व्यवसायी थे जिनके खुद के अलग राजनीतिक मतलब थे। BJP,SP और कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद अब AAP में अपनी किस्मत आज़माना चाहते थे।एक सोचा समझा स्टंट जो बुरी तरह से गलत हो गया , उसमे इन्हें रखा गया। योजना के मुताबिक उसे सुसाइड से रोके जाने पर उसे मंच पर लाकर वो चिट्ठी जो की बाद में सुसाइड नोट केहलाई, वह पढ़ना था । पर जब तक यह पता चलता की योजना बुरी तरह गलत हो गयी , बहुत देर हो चुकी थी । और देश के लोगों के सामने AAP का अमानव चेहरा फिर सामने आ गया।

दिल्ली पुलिस ने इस केस में कुछ अज्ञात लोगों पर IPC के Sec 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और Sec 186 (सरकारी काम में बाधा डालना) लगाई है। 

 

{youtube}TvmTN3vdkNM{/youtube} 

 

{youtube}2T0fjQDloug{/youtube} 

Thursday, 23 April 2015 05:03

When Political Stunts Go Out of Hand

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 During AAP's rally in Delhi, a person comitted suicide by hanging himself on a tree in front of Kejriwal. An insight into the matter 

Congress model of development and governance is simple:

Monday, 20 April 2015 08:26

Why is Congress afraid of reforms?

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Congress is playing the dangerous and dirty game of projecting business and industry as villains. But far more distressing is to see educated Indians falling for the bait.

Is land acquisition evil? is it anti farmer? Is Indian Government hand in glove with the corporates in exploiting the poor ?
Well, isn't this what the leftists would like us to believe. Ground facts are in a stark contrast to the picture that's painted in media to manufacture a misinformed dissent.

Saturday, 18 April 2015 13:33

Rest in Peace: What does it mean ?

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It's become a common practice to say RIP (Rest in Peace) when someone passes away. Is is culturally accurate?

Monday, 13 April 2015 10:33

Attack on Hindus post Babri demolition

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Hindus world over saw a large scale persecution as an aftermath of Babri Masjid demolition. Be it inside Indian territory or outside, they had to face the wrath of jihadi bigots who are not prepared to give peace any chance.

भाषा के आधार पर अलग-अलग प्रान्त, मजहब के आधार पर अलग-अलग कानून, जातपात के आधार पर अलग-अलग सुविधाएं - ये व्यवस्थाएं देश को जोड़ नहीं रही हैं, अपितु बांट रही हैं।

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