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सनातन धर्म का चमत्कार: 55 डिग्री गर्मी में शिव मंदिर से निकलती हैं शीतल हवाएँ

05 Jul 16
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Published in Daily Fix

सनातन धर्म का चमत्कार: 55 डिग्री गर्मी में शिव मंदिर से निकलती हैं शीतल हवाएँ. जहां एक ओर शेखूलर दुष्ट हिन्दू धर्म पर कीचड़ उछलने में लगे हैं वहीं एक ऐसा अनोखा दिव्य चमत्कारी मंदिर देखने में आया है जिसमें स्थापित शिव-पार्वती की मूर्ति से ठंडी हवाएँ निकल कर भयानक गर्मी में राहत देती हैं। 

जिन महीनों में भयानक गर्मी से पूरा भारत बेहाल होता है, उस दौरान वह जगह ठंडी होती जाती है. देशभर में जैसे-जैसे गर्मी के बढ़ती जाती वहीं उस जगह में ठंडक का स्तर बढ़ने लगता है. इस बढ़ती हुई ठंडक की वजह कोई AC या कूलर नहीं है. यह जगह ओडीशा के टिटलागढ़ में एक चमत्कारी शिव मंदिर है. देशभर में टिटलागढ़ भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है. यहां कुम्हड़ा पहाड़ की पथरीली चट्टानों के कारण तापमान बहुत ज्यादा रहता है. इस पहाड़ की ऊंचाई पर टेम्प्रेचर 55 डिग्री तक पहुंचता है. इतनी गर्मी पड़ने के बावजूद कुम्हड़ा पहाड़ के एक हिस्से में ऐसा मंदिर भी है जहां बेहद ठंडक रहती है.

बाहर की चिलचिलाती गर्मी से जैसे ही आप मंदिर के अंदर प्रवेश करेंगे तो आपको AC जैसी कूलिंग का एहसास होगा, जबकि यहां कोई AC या कूलर नहीं लगा है. बाहर जितनी गर्मी होती है अंदर उतना ठंडा रहता है. इस चमत्कारी मंदिर में भगवना शिव और मां पार्वती की मूर्ति है. ऐसा माना जाता है कि इन मूर्तियों से ही ठंडी हवा आती है, जो यहां के वातावरण को गर्म नहीं रहने देती है.

जब मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं तो इन हवाओं से अंदर बहुत ठंडक हो जाती है. कई बार यहां इतनी ठंड बढ़ जाती है कि पुजारियों को कंबल ओढ़ना पड़ता है वहीं मंदिर के बाहर इतनी गर्मी होती है कि 5 मिनट में आप पसीने से पूरी तरह तर हो जाएं और हो सकता है कि लू लग जाए. गर्मी में भी इस मंदिर में ठंडक बने रहने के चमत्कार के रहस्य का सही कारण अभी तक कोई नहीं जान पाया है. मंदिर के पुजारी पंडित सुमन पाढ़ी बताते हैं कि बाहर जैसे- जैसे धूप बढ़ती है, वैसे-वैसे मंदिर के अंदर ठंड बढ़ती जाती है। मान्यता है यहां स्थापित प्रतिमाओं से ठंडी हवा आती है। मंदिर का दरवाजा बंद करने पर उस ठंडी हवा से पूरा मंदिर ठंडा हो जाता है। पंडित को कई बार कंबल भी ओढ़ना पड़ जाता है। मंदिर के बाहर इतनी गर्मी है कि सिर्फ एक कदम बाहर निकलकर कोई व्यक्ति 5 मिनट खड़ा हो जाए तो वह पसीने से तर हो जाएगा। ऐसा क्यों होता है इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है, क्षेत्र के लोग इसे दैवीय प्रभाव मानते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इसका कोई न कोई वैज्ञानिक आधार भी होगा। 3000 साल पुराना है मंदिर

साभार आज तक एवं भास्कर 

 

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